shab-e-wa'ada hai tu hai aur main hooñ | शब-ए-व'अदा है तू है और मैं हूँ

  - Jalal Lakhnavi
शब-ए-व'अदाहैतूहैऔरमैंहूँ
हुजूम-ए-आरज़ूहैऔरमैंहूँ
दिल-ए-बेगाना-ख़ूहैऔरमैंहूँ
बग़लमेंइकअदूहैऔरमैंहूँ
मिटाताहीरहाजिसकोमुक़द्दर
वोमेरीआरज़ूहैऔरमैंहूँ
परेशाँ-ख़ातिरीकहतीहैअपनी
किसीकीजुस्तुजूहैऔरमैंहूँ
शब-ए-तन्हाई-ए-फ़ुर्क़तमेंदिलसे
कुछउसकीगुफ़्तुगूहैऔरमैंहूँ
गुलिस्तान-ए-जहाँहैक़ाबिल-ए-सैर
तिलिस्म-ए-रंग-ओ-बूहैऔरमैंहूँ
निगाह-ए-लुत्फ़-ए-दिलबरकाहैइज़हार
फटेदिलकारफ़ूहैऔरमैंहूँ
कहींछोड़ाअगरक़ातिलकादामन
तूफिरमेरालहूहैऔरमैंहूँ
'जलाल'उसकोबनायाउसनेदुश्मन
क़यामतमेंअदूहैऔरमैंहूँ
  - Jalal Lakhnavi
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