sad-shukr bujh gaii tiri talwaar ki havas | सद-शुक्र बुझ गई तिरी तलवार की हवस

  - Jalal Lakhnavi
सद-शुक्रबुझगईतिरीतलवारकीहवस
क़ातिलयहीथीतेरेगुनहगारकीहवस
मुर्देकोभीमज़ारमेंलेनेदेगीचैन
ता-हश्रतेरेसाया-ए-दीवारकीहवस
सौबारआएग़शअरिनीहीकहूँगामैं
मूसानहींकिफिरहोदीदारकीहवस
रिज़वाँकहाँयेख़ुल्दइरमऔरमैंकहाँ
आएथेलेकेकूचा-ए-दिलदारकीहवस
सय्यादजबक़फ़ससेनिकालाथाबहर-ए-ज़ब्ह
पूछीतोहोतीमुर्ग़-ए-गिरफ़्तारकीहवस
यूसुफ़कोतेरीचाहकेसौदेकीआरज़ू
ईसाकोतेरेइश्क़केआज़ारकीहवस
दस्त-ए-हवा-ए-गुलमेंगरेबानहैमिरा
दामनजुनूँमेंखींचतीहैख़ारकीहवस
जबहोकिसीकारिश्ता-ए-उल्फ़तगलेकातौक़
दीवाना-पनहैसुब्हा-ओ-ज़ुन्नारकीहवस
मानेहैज़ब्तचर्ख़फुंकेक्यूँँकर'जलाल'
किसतरहनिकलेआह-ए-शरर-बारकीहवस
  - Jalal Lakhnavi
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