jab bhi zulfon ko tire rukh pe bikharte dekha | जब भी ज़ुल्फ़ों को तिरे रुख़ पे बिखरते देखा

  - Jalal Aarif
जबभीज़ुल्फ़ोंकोतिरेरुख़पेबिखरतेदेखा
होकेशर्मिंदाघटाओंकोगुज़रतेदेखा
दिलसेचुप-चापतुझेजबभीगुज़रतेदेखा
याद-ए-माज़ीकाहरइकनक़्शउभरतेदेखा
कितनेख़्वाबोंकोशब-ओ-रोज़बिखरतेदेखा
फिरभीइकपलज़मानेकोठहरतेदेखा
बातकुछउनकीजवानीपेहीमौक़ूफ़नहीं
चढ़तेदरियाकोभीइकरोज़उतरतेदेखा
आईवोरौशनीहालातकेबाज़ारोंमें
अपनेसाएसेभीहरशख़्सकोडरतेदेखा
कोंपलेंफूटीहैंशाख़ोंपेनएमौसमकी
जिसघड़ीजौर-ए-ख़िज़ाँहदसेगुज़रतेदेखा
बहर-ए-उल्फ़तमेंतसव्वुरहीकहाँसाहिलका
डूबनेवालेकोहीपारउतरतेदेखा
राहतेंमौतहैंइंसानकेहक़में'आरिफ़'
दिलकीफ़ितरतकोमसाइबमेंसँवरतेदेखा
  - Jalal Aarif
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