yaad ayyaam-e-rafta yuñ aa.e | याद अय्याम-ए-रफ़्ता यूँँ आए

  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
यादअय्याम-ए-रफ़्तायूँँआए
धुँदलेधुँदलेसेजैसेकुछसाए
जैसेउड़तेहुएपरिंदेका
नग़्मादमभरफ़ज़ामेंलहराए
जैसेवीरानदिलकेगुलशनमें
चुपकेचुपकेबहारजाए
सूनीसूनीसीजैसेमहफ़िलमें
दफ़अ'तनजान-ए-इंतिज़ारआए
जैसेअब्र-ए-सियहकेपर्देमें
चाँदकीइककिरनथिरकजाए
जैसेसुनसानरहगुज़ारोंमें
यक-ब-यकइकचराग़जलजाए
याकोईरिंद-ए-तिश्ना-लबजैसे
दस्त-ए-साक़ीसेजामपाजाए
जैसेमहजूरएकग़ज़लगाकर
अपनेग़मगीनदिलकोबहलाए
जैसेतारीकशबकासन्नाटा
नग़्मा-ए-लयसेटूटताजाए
एकतूफ़ाँ-ज़दामुसाफ़िरके
जैसेसाहिलक़रीबजाए
जैसेतपतेसेरेगज़ारोंमें
अब्र-ए-रहमतज़राबरसजाए
जैसेपहलीकिरनसवेरेकी
रौज़न-ए-शबसेझाँकतीजाए
जैसेबाद-ए-सबाकेझोंकोंसे
ग़मकेमारोंकोनींदजाए
जैसेग़ुर्बतमेंभटकेराहीको
इकपयाम-ए-'हबीब'जाए
  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
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