talaash-e-rahbar na khawf-e-manziel na fikr koi hai jism-o-jaan ki | तलाश-ए-रहबर न ख़ौफ़-ए-मंज़िल न फ़िक्र कोई है जिस्म-ओ-जाँ की

  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
तलाश-ए-रहबरख़ौफ़-ए-मंज़िलफ़िक्रकोईहैजिस्म-ओ-जाँकी
जुनूँसलामततोकिसकोपर्वारहेवफ़ाकेहरइम्तिहाँकी
जोतुमनेदेखाहैमुस्कुराकरक़दमज़मानेकेरुकगएहैं
उसइकनिगाह-ए-करमसेपहलेकहाँथीमुझपरनज़रजहाँकी
बयानगरचेथादर्ददिलकामगरथाकैफ़-ओ-असरसेख़ाली
जोनामआयाहैउसमेंतेराबढ़ीहैलज़्ज़तभीदास्ताँकी
रविशपेमहव-ए-ख़िरामहोकरजगाएक्याक्यातुमनेजादू
कलीमेंरंगतगुलोंमेंनिकहतज़ीनतऐसीथीगुल्सिताँकी
जमाल-ए-जानाँकीजल्वा-गाहेंजहाँभीजाऊँवहाँपेपाऊँ
झुकाऊँसरकोजहाँभीअपनेवहींपेचौखटहैआस्ताँकी
कभीइंसाँकेदिलमेंझाँकाकभीखोदाख़ज़ाना-ए-दिल
ज़मींकेरुख़सेहटाएपर्देतोबातकीहमनेआसमाँकी
ज़रूरआएँगीफिरबहारेंचमनमेंफिररक़्स-ओ-रंगहोगा
बाद-ए-सर-सरकेहोंगेझोंकेयूरिशेंहोंगीफिरख़िज़ाँकी
येजानताहूँकिउसकामुद्दतसेतिनकातिनकाबिखररहाहै
जानेफिरक्यूँयेयादपैहमहैमेरेउजड़ेसेआशियाँकी
जोआरज़ूको'हबीब'पुख़्तातोक़ुर्ब-ओ-दूरीकाफ़र्क़कैसा
मिरेतसव्वुरनेख़त्मकरदीजोदूरीहममेंथीदरमियाँकी
  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
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