nigaah-e-mukhtasar se dastaan tak baat ja pahunchee | निगाह-ए-मुख़्तसर से दास्ताँ तक बात जा पहुँची

  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
निगाह-ए-मुख़्तसरसेदास्ताँतकबातजापहुँची
ख़ुदाजानेकहाँसेअबकहाँतकबातजापहुँची
निगाहोंकीज़बाँनेकहदियाजोकुछकहनाथा
दिल-ए-सोज़ाँसेजबअश्क-ए-रवाँतकबातजापहुँची
सँवरउट्ठीहैक्याज़ुल्फ़-ए-ज़मींअबदस्त-ए-इंसाँसे
किमाह-ओ-मुश्तरी-ओ-आसमाँतकबातजापहुँची
हुआतोफ़ैसलादिलकाइशारोंमेंकुनाएँमें
कहाँवोलुत्फ़जबलफ़्ज़-ए-बयाँतकबातजापहुँची
बलासेसाज़-ए-दिलटूटेसदालेकिनपैदाहो
हुईरुस्वामोहब्बतजबफ़ुग़ाँतकबातजापहुँची
गईशायदजवानीऔरगयाअंदाज़-ए-जुरअतभी
किअबअंदेशा-ए-सूदज़ियाँतकबातजापहुँची
कभीगुलशनमेंअपनाभीनशेमनथाचमनवालो
ख़ुदाजानेयेक्यूँबर्क़-ए-तपाँतकबातजापहुँची
नज़रबे-बाकदिलबेबाकक्यापर्वा'हबीब'उसकी
यहाँतकबातजापहुँचीवहाँतकबातजापहुँची
  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
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