apne haal-e-dil pe KHud hi muskuraa saka hooñ main | अपने हाल-ए-दिल पे ख़ुद ही मुस्कुरा सकता हूँ मैं

  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
अपनेहाल-ए-दिलपेख़ुदहीमुस्कुरासकताहूँमैं
कबकिसीकेरहमकाएहसाँउठासकताहूँमैं
आशियाँकोफूँकसकतीहैअगरचेबिजलियाँ
शाख़-ए-गुलपरबारबारइसकोबनासकताहूँमैं
दास्तान-ए-ग़मकोकहसकताहूँसिर्फ़इकआहमैं
औरतुमचाहोतोअफ़्सानाबनासकताहूँमैं
तुमअगरचेबख़्शसकतेहोमुझेतन्हाइयाँ
अपनीतन्हाईकोभीमहफ़िलबनासकताहूँमैं
बे-रुख़ीसेतोड़सकतेहोदिल-ए-नाज़ुककोतुम
औरशिकस्ता-साज़दिलपरगुनगुनासकताहूँमैं
हरक़दमपरज़ीस्तनेकरझिंझोड़ाहैमुझे
ज़िंदगीसेक्याकभीआँखेंचुरासकताहूँमैं
इतनीदेखीहैंबहारेंइतनीदेखीहैख़िज़ाँ
अबतोइनकाफ़र्क़भीदिलसेमिटासकताहूँमैं
तुमकोयेदा'वाकितुमहरअंजुमनकीजानहो
ज़ो'महैमुझकोकिहरमहफ़िलपेछासकताहोमैं
वोनिगाह-ए-लुत्फ़गरतुझकोमुयस्सरहो'हबीब'
ज़िंदगीकोइकनईमंज़िलपेलासकताहूँमैं
  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
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