poshida tha jo sab pe ayaan kyun nahin hua | पोशीदा था जो सब पे अयाँ क्यूँँ नहीं हुआ

  - Jafar Sahni
पोशीदाथाजोसबपेअयाँक्यूँँनहींहुआ
हक़मेंहमारेनेकगुमाँक्यूँँनहींहुआ
सरसब्ज़होकेदिल-नशींबनजातीयेज़मीं
ऐसागुदाज़सैल-ए-रवाँक्यूँँनहींहुआ
नग़्मोंकेदरमियानफ़सानाथापुर-कशिश
दिलकशफ़ज़ामेंरक़्सजवाँक्यूँँनहींहुआ
कलतकगलीहमारीदरख़्शाँहोसकी
अबतोबताओऐसामियाँक्यूँँनहींहुआ
शान-ओ-शिकोहमेंवोहमेशाथाताज़ा-दम
घरकीफ़ज़ामेंजज़्बमकाँक्यूँँनहींहुआ
जलतारहाहमाराज़मानाचहार-सू
शो'लोंकेबीचउसकाजहाँक्यूँँनहींहुआ
चेहराखुलासाउनकीनज़रकेक़रीबथा
पेश-ए-निगाहदर्द-ए-निहाँक्यूँँनहींहुआ
हैरत-ज़दाथीअक़्लहमारीयेसोचकर
जोकुछवहाँहुआथायहाँक्यूँँनहींहुआ
हम्द-ओ-सनादु'आसेसँवारागयाथाशहर
'जाफ़र'मगरवोजा-ए-अमाँक्यूँँनहींहुआ
  - Jafar Sahni
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