ek ma'soom tamannaa ki fazaa thii kal tak | एक मा'सूम तमन्ना की फ़ज़ा थी कल तक

  - Jafar Sahni
एकमा'सूमतमन्नाकीफ़ज़ाथीकलतक
ज़िंदगीऐसीकहाँहोश-रुबाथीकलतक
ग़ैज़आँधीकाबनाअबहैमुक़द्दरमेरा
दिलकेआँगनमेंमहकतीसीसबाथीकलतक
नग़्मगीगईकिसतौरसेउसकेलबपर
जिसकीआवाज़तरन्नुमसेजुदाथीकलतक
आजख़ामोशबहुतबज़्म-ए-बहाराँक्यूँँहै
गुनगुनातेसेलिबादेमेंहवाथीकलतक
हुस्नकीशोख़-नज़रमाँगेहैक़ीमतअपनी
झुकतीआँखोंकेदरीचेमेंहयाथीकलतक
येजोहंगामोंसेमरबूतहैमहफ़िलमेरी
कैफ़-ज़ादिल-रुबाबुलबुलकीसदाथीकलतक
सर-निगूँवक़्तकेक़दमोंमेंहैख़्वाहिशअपनी
वर्नाहरसाँसमेंइकमौज-ए-अनाथीकलतक
अबकहाँशौक़कोमिलताहैबढ़ावा'जाफ़र'
नर्मपलकोंमेंघुलीएकअदाथीकलतक
  - Jafar Sahni
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