वसीअजंगलहैएकजानिबपहाड़ोंकासिलसिलाचलाहै
शामआहिस्तगीसेपेड़ोंपेकुहनियाँटेकतीहै
सूरजकिरनकिरनअपनीरौशनीरेहनरखकेग़र्बीदयार-ए-फ़लकीसे
बादलोंकालिहाफ़लेकर
यक-शबीनींदकेतसव्वुरमेंऊँघताहै
ख़िज़ाँ-रसीदाअनारकाइकशजरखड़ाहै
मैंजिसकेनीचे
अहद-ओ-पैमाँकेलालयाक़ूत
इज़हारओइक़रारकेज़मुर्रद
किसीकोदेताहूँ
औरलेताहूँ
औरलफ़्ज़ोंकीइसतिजारतपे
अपनीनींदमेंमुस्कुरारहाहूँ