wasi'a jungle hai ek jaanib pahaadon ka silsila chala hai | वसीअ जंगल है एक जानिब पहाड़ों का सिलसिला चला है

  - Jabbar Jameel
वसीअजंगलहैएकजानिबपहाड़ोंकासिलसिलाचलाहै
शामआहिस्तगीसेपेड़ोंपेकुहनियाँटेकतीहै
सूरजकिरनकिरनअपनीरौशनीरेहनरखकेग़र्बीदयार-ए-फ़लकीसे
बादलोंकालिहाफ़लेकर
यक-शबीनींदकेतसव्वुरमेंऊँघताहै
ख़िज़ाँ-रसीदाअनारकाइकशजरखड़ाहै
मैंजिसकेनीचे
अहद-ओ-पैमाँकेलालयाक़ूत
इज़हारइक़रारकेज़मुर्रद
किसीकोदेताहूँ
औरलेताहूँ
औरलफ़्ज़ोंकीइसतिजारतपे
अपनीनींदमेंमुस्कुरारहाहूँ
  - Jabbar Jameel
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