zulfen seena naaf kamar | ज़ुल्फ़ें सीना नाफ़ कमर

  - Jaan Nisar Akhtar
ज़ुल्फ़ेंसीनानाफ़कमर
एकनदीमेंकितनेभँवर
सदियोंसदियोंमेरासफ़र
मंज़िलमंज़िलराहगुज़र
कितनामुश्किलकितनाकठिन
जीनेसेजीनेकाहुनर
गाँवमेंकरशहरबसे
गाँवबिचारेजाएँकिधर
फूँकनेवालेसोचाभी
फैलेगीयेआगकिधर
लाखतरहसेनामतिरा
बैठालिक्खूँकाग़ज़पर
छोटेछोटेज़ेहनकेलोग
हमसेउनकीबातकर
पेटपेपत्थरबाँधले
हाथमेंसजतेहैंपत्थर
रातकेपीछेरातचले
ख़्वाबहुआहरख़्वाब-ए-सहर
शबभरतोआवाराफिरे
लौटचलेंअबअपनेघर
  - Jaan Nisar Akhtar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy