ai dard-e-ishq tujh se mukarne laga hooñ main | ऐ दर्द-ए-इश्क़ तुझ से मुकरने लगा हूँ मैं

  - Jaan Nisar Akhtar
दर्द-ए-इश्क़तुझसेमुकरनेलगाहूँमैं
मुझकोसँभालहदसेगुज़रनेलगाहूँमैं
पहलेहक़ीक़तोंहीसेमतलबथाऔरअब
एकआधबातफ़र्ज़भीकरनेलगाहूँमैं
हरआनटूटतेयेअक़ीदोंकेसिलसिले
लगताहैजैसेआजबिखरनेलगाहूँमैं
चश्म-ए-यारमेरासुधरनामुहालथा
तेराकमालहैकिसुधरनेलगाहूँमैं
येमेहर-ओ-माहअर्ज़-ओ-समामुझमेंखोगए
इककाएनातबनकेउभरनेलगाहूँमैं
इतनोंकाप्यारमुझसेसँभालाजाएगा
लोगोंतुम्हारेप्यारसेडरनेलगाहूँमैं
दिल्लीकहाँगईंतेरेकूचोंकीरौनक़ें
गलियोंसेसरझुकाकेगुज़रनेलगाहूँमैं
  - Jaan Nisar Akhtar
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