zameen hogii kisi qaateel ka daamaan ham na kahte the | ज़मीं होगी किसी क़ातिल का दामाँ हम न कहते थे

  - Jaan Nisar Akhtar
ज़मींहोगीकिसीक़ातिलकादामाँहमकहतेथे
अकारतजाएगाख़ून-ए-शहीदाँहमकहतेथे
इलाज-ए-चाक-ए-पैराहनहुआतोइसतरहहोगा
सियाजाएगाकाँटोंसेगरेबाँहमकहतेथे
तरानेकुछदिएलफ़्ज़ोंमेंख़ुदकोक़ैदकरलेंगे
अजबअंदाज़सेफैलेगाज़िंदाँहमकहतेथे
कोईइतनाहोगालाशभीलेजाकेदफ़नादे
इन्हींसड़कोंपेमरजाएगाइंसाँहमकहतेथे
नज़रलिपटीहैशोलोंमेंलहूतपताहैआँखोंमें
उठाहीचाहताहैकोईतूफ़ाँहमकहतेथे
छलकतेजाममेंभीगीहुईआँखेंउतरआईं
सताएगीकिसीदिनयाद-ए-याराँहमकहतेथे
नईतहज़ीबकैसेलखनऊकोरासआएगी
उजड़जाएगायेशहर-ए-ग़ज़ालाँहमकहतेथे
  - Jaan Nisar Akhtar
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