har ek shaKHs pareshaan-o-dar-badar sa lage | हर एक शख़्स परेशान-ओ-दर-बदर सा लगे

  - Jaan Nisar Akhtar
हरएकशख़्सपरेशान-ओ-दर-बदरसालगे
येशहरमुझकोतोयारोकोईभँवरसालगे
अबउसकेतर्ज़-ए-तजाहुलकोक्याकहेकोई
वोबे-ख़बरतोनहींफिरभीबे-ख़बरसालगे
हरएकग़मकोख़ुशीकीतरहबरतनाहै
येदौरवोहैकिजीनाभीइकहुनरसालगे
नशात-ए-सोहबत-ए-रिंदाँबहुतग़नीमतहै
किलम्हालम्हापुर-आशोब-ओ-पुर-ख़तरसालगे
किसेख़बरहैकिदुनियाकाहश्रक्याहोगा
कभीकभीतोमुझेआदमीसेडरसालगे
वोतुंदवक़्तकीरौहैकिपाँवटिकसकें
हरआदमीकोईउखड़ाहुआशजरसालगे
जहान-ए-नौकेमुकम्मलसिंगारकीख़ातिर
सदीसदीकाज़मानाभीमुख़्तसरसालगे
  - Jaan Nisar Akhtar
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