vo log hi har daur men mahboob rahe hain | वो लोग ही हर दौर में महबूब रहे हैं

  - Jaan Nisar Akhtar
वोलोगहीहरदौरमेंमहबूबरहेहैं
जोइश्क़मेंतालिबनहींमतलूबरहेहैं
तूफ़ानकीआवाज़तोआतीनहींलेकिन
लगताहैसफ़ीनेसेकहींडूबरहेहैं
उनकोपुकारोग़म-ए-दौराँकेलक़बसे
जोदर्दकिसीनामसेमंसूबरहेहैं
हमभीतिरीसूरतकेपरस्तारहैंलेकिन
कुछऔरभीचेहरेहमेंमर्ग़ूबरहेहैं
अल्फ़ाज़मेंइज़हार-ए-मोहब्बतकेतरीक़े
ख़ुदइश्क़कीनज़रोंमेंभीमायूबरहेहैं
इसअहद-ए-बसीरतमेंभीनक़्क़ादहमारे
हरएकबड़ेनामसेमरऊबरहेहैं
इतनाभीघबराओनईतर्ज़-ए-अदास
हरदौरमेंबदलेहुएउस्लूबरहेहैं
  - Jaan Nisar Akhtar
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