aañkhen chura ke ham se bahaar aa.e ye nahin | आँखें चुरा के हम से बहार आए ये नहीं

  - Jaan Nisar Akhtar
आँखेंचुराकेहमसेबहारआएयेनहीं
हिस्सेमेंअपनेसिर्फ़ग़ुबारआएयेनहीं
कू-ए-ग़म-ए-हयातमेंसबउम्रकाटदी
थोड़ासावक़्तवाँभीगुज़ारआएयेनहीं
ख़ुदइश्क़क़ुर्ब-ए-जिस्मभीहैक़ुर्ब-ए-जाँकेसाथ
हमदूरहीसेउनकोपुकारआएयेनहीं
आँखोंमेंदिलखुलेहोंतोमौसमकीक़ैदक्या
फ़स्ल-ए-बहारहीमेंबहारआएयेनहीं
अबक्याकरेंकिहुस्नजहाँहैअज़ीज़है
तेरेसिवाकिसीपेप्यारआएयेनहीं
वा'दोंकोख़ून-ए-दिलसेलिखोतबतोबातहै
काग़ज़पेक़िस्मतोंकोसँवारआएयेनहीं
कुछरोज़औरकलकीमुरव्वतमेंकाटलें
दिलकोयक़ीन-ए-वादा-ए-यारआएयेनहीं
  - Jaan Nisar Akhtar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy