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Irshad 'Arsh'
naam ko hi ye chat aur chappar hota hai
naam ko hi ye chat aur chappar hota hai | नाम को ही ये छत और छप्पर होता है
- Irshad 'Arsh'
नाम
को
ही
ये
छत
और
छप्पर
होता
है
घर
तो
माँ
के
होने
से
घर
होता
है
- Irshad 'Arsh'
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बूढ़ी
माँ
का
शायद
लौट
आया
बचपन
गुड़ियों
का
अम्बार
लगा
कर
बैठ
गई
Irshad Khan Sikandar
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कल
अपने-आप
को
देखा
था
माँ
की
आँखों
में
ये
आईना
हमें
बूढ़ा
नहीं
बताता
है
Munawwar Rana
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नज़रें
हो
गड़ीं
जिनकी
वसीयत
पे
दिनो-रात
माँ-बाप
कि
'उम्रों
कि
दु'आ
ख़ाक
करेंगे
Asad Akbarabadi
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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अब
शहर
की
थकावट
बेचैन
कर
रही
है
अब
शाम
हो
गई
है
चल
माँ
से
बात
कर
लें
Akash Rajpoot
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चलती
फिरती
हुई
आँखों
से
अज़ाँ
देखी
है
मैं
ने
जन्नत
तो
नहीं
देखी
है
माँ
देखी
है
Munawwar Rana
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वो
उजला
हो
कि
मैला
हो
या
महँगा
हो
कि
सस्ता
हो
ये
माँ
का
सर
है
इस
पर
हर
दुपट्टा
मुस्कुराता
है
Siraj Faisal Khan
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माँ
बाप
और
उस्ताद
सब
हैं
ख़ुदा
की
रहमत
है
रोक-टोक
उन
की
हक़
में
तुम्हारे
नेमत
Altaf Hussain Hali
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आज
फिर
बेटे
को
माँ
जाहिल
लगी
है
सोचिए
क्या
सीखा
हमने
डिग्रियों
से
Neeraj Neer
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अज़ीज़-तर
मुझे
रखता
है
वो
रग-ए-जाँ
से
ये
बात
सच
है
मेरा
बाप
कम
नहीं
माँ
से
Tahir Shaheer
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किसी
से
जब
हमें
शिकवा
नहीं
तो
किसी
की
फिर
शिकायत
क्यूँ
करें
हम
Irshad 'Arsh'
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हो
भी
सकता
है
मेरे
यार
मदीने
का
सफ़र
मैं
ने
कल
रात
खजूरों
के
शजर
देखे
हैं
Irshad 'Arsh'
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वो
मोहब्बत
में
गिरफ़्तार
हो
भी
सकता
है
आदमी
है
तो
गुनहगार
हो
भी
सकता
है
वक़्त
के
साथ
बदलते
हुऐ
देखा
है
उसे
आज
दुश्मन
है
तो
कल
यार
हो
भी
सकता
है
नया
किरदार
कहानी
में
उतर
आया
तो
ख़त्म
देखो
मेरा
क़िरदार
हो
भी
सकता
है
हाकि
में
वक़्त
की
जो
मैंने
शिकायत
की
है
अब
मुख़ालिफ़
मेरा
अख़बार
हो
भी
सकता
है
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Irshad 'Arsh'
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बड़े
ग़ैज़-ओ-ग़ज़ब
में
है
ये
सूरज
मुसलसल
आग
उगलता
जा
रहा
है
Irshad 'Arsh'
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किसी
का
आइना
हो
करके
देखो
मियाँ
सच
बोलना
आसाँ
नहीं
है
Irshad 'Arsh'
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