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Irshad 'Arsh'
bade ghaiz-o-ghazab men hai ye suraj
bade ghaiz-o-ghazab men hai ye suraj | बड़े ग़ैज़-ओ-ग़ज़ब में है ये सूरज
- Irshad 'Arsh'
बड़े
ग़ैज़-ओ-ग़ज़ब
में
है
ये
सूरज
मुसलसल
आग
उगलता
जा
रहा
है
- Irshad 'Arsh'
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आग
का
क्या
है
पल
दो
पल
में
लगती
है
बुझते
बुझते
एक
ज़माना
लगता
है
Kaif Bhopali
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हो
न
हो
एक
ही
तस्वीर
के
दो
पहलू
हैं
रक़्स
करता
हुआ
तू
आग
में
जलता
हुआ
मैं
Shahid Zaki
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जब
सर-ए-शाम
पजीराई-ए-फ़न
होती
है
शाहज़ादी
को
कनीज़ों
से
जलन
होती
है
ले
तो
आया
हूँ
तुझे
घेर
के
अपनी
जानिब
आगे
इंसान
की
अपनी
भी
लगन
होती
है
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Azhar Faragh
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समझ
के
आग
लगाना
हमारे
घर
में
तुम
हमारे
घर
के
बराबर
तुम्हारा
भी
घर
है
Hafeez Banarasi
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दिल
की
तकलीफ़
कम
नहीं
करते
अब
कोई
शिकवा
हम
नहीं
करते
Jaun Elia
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ख़ुदा
के
लिए
अब
न
उस
सेे
मिलो
तुम
तुम्हें
अब
हमारी
जलन
की
क़सम
है
Tanoj Dadhich
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उसूलों
पे
जहाँ
आँच
आए
टकराना
ज़रूरी
है
जो
ज़िन्दा
हों
तो
फिर
ज़िन्दा
नज़र
आना
ज़रूरी
है
Waseem Barelvi
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पेड़
का
दुख
तो
कोई
पूछने
वाला
ही
न
था
अपनी
ही
आग
में
जलता
हुआ
साया
देखा
Jameel Malik
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बाद-ए-बहार
में
सब
आतिश
जुनून
की
है
हर
साल
आवती
है
गर्मी
में
फ़स्ल-ए-होली
Wali Uzlat
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दिल
की
ख़ातिर
एक
रिश्ते
को
बचाने
के
लिए
आग
मैंने
ही
लगा
ली
ख़ुद
मिरे
घरबार
में
Shashank Shekhar Pathak
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शायद
कि
इसलिए
भी
सुख़न-वर
हुआ
हूँ
मैं
मेरी
कभी
बनी
ही
नहीं
ज़िंदगी
के
साथ
Irshad 'Arsh'
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ज़रा
मुश्किल
हो
तो
एहसास
होता
है
हमें
वरना
कहाँ
आसानियों
में
ज़िंदगी
मालूम
होती
है
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हम
कभी
चांँद
की
मानिंद
हुआ
करते
थे
अब
उन्हें
चाँद
में
भी
दाग़
नज़र
आते
हैं
Irshad 'Arsh'
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उजाले
छोड़
अँधेरों
से
दोस्ती
करता
किसी
बहाने
से
मैं
ख़त्म
ज़िंदगी
करता
इसी
कमाल
ने
मुझ
को
बचा
लिया
वर्ना
मैं
शा'इरी
नहीं
करता
तो
ख़ुद-कुशी
करता
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Irshad 'Arsh'
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छोटी
सी
ज़िंदगी
है
गुज़ारो
ख़ुशी
के
साथ
अपना
मुवाज़ना
नहीं
करते
किसी
के
साथ
या
रब
मेरे
नसीब
में
कुछ
माल-ओ-ज़र
भी
हो
कब
तक
जि
यूँँगा
ऐसे
भला
मुफ़लिसी
के
साथ
शायद
कि
इसलिए
भी
सुख़न-वर
हुआ
हूँ
मैं
मेरी
कभी
बनी
ही
नहीं
ज़िंदगी
के
साथ
'इरशाद'
इक
वो
शख़्स
कि
जिस
पर
यक़ीन
था
वो
भी
निकल
चुका
है
सफ़र
पर
किसी
के
साथ
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