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Irshad 'Arsh'
chhoti si zindagi hai guzaaro khushi ke saath
chhoti si zindagi hai guzaaro khushi ke saath | छोटी सी ज़िंदगी है गुज़ारो ख़ुशी के साथ
- Irshad 'Arsh'
छोटी
सी
ज़िंदगी
है
गुज़ारो
ख़ुशी
के
साथ
अपना
मुवाज़ना
नहीं
करते
किसी
के
साथ
या
रब
मेरे
नसीब
में
कुछ
माल-ओ-ज़र
भी
हो
कब
तक
जि
यूँँगा
ऐसे
भला
मुफ़लिसी
के
साथ
शायद
कि
इसलिए
भी
सुख़न-वर
हुआ
हूँ
मैं
मेरी
कभी
बनी
ही
नहीं
ज़िंदगी
के
साथ
'इरशाद'
इक
वो
शख़्स
कि
जिस
पर
यक़ीन
था
वो
भी
निकल
चुका
है
सफ़र
पर
किसी
के
साथ
- Irshad 'Arsh'
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दर्द-ए-मुहब्बत
दर्द-ए-जुदाई
दोनों
को
इक
साथ
मिला
तू
भी
तन्हा
मैं
भी
तन्हा
आ
इस
बात
पे
हाथ
मिला
Abrar Kashif
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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जानता
हूँ
कि
तुझे
साथ
तो
रखते
हैं
कई
पूछना
था
कि
तेरा
ध्यान
भी
रखता
है
कोई?
Umair Najmi
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जता
दिया
कि
मोहब्बत
में
ग़म
भी
होते
हैं
दिया
गुलाब
तो
काँटे
भी
थे
गुलाब
के
साथ
Rehman Faris
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टेंशन
से
मरेगा
न
कोरोने
से
मरेगा
इक
शख़्स
तेरे
साथ
न
होने
से
मरेगा
Idris Babar
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तेरे
बिन
घड़ियाँ
गिनी
हैं
रात
दिन
नौ
बरस
ग्यारह
महीने
सात
दिन
Rehman Faris
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सवाल
है
घड़ी
ईजाद
करने
वाले
से
मिलायी
पहली
घड़ी
उसने
किस
घड़ी
के
साथ
Raj
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अच्छा
है
दिल
के
साथ
रहे
पासबान-ए-अक़्ल
लेकिन
कभी
कभी
इसे
तन्हा
भी
छोड़
दे
Allama Iqbal
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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सँभलता
हूँ
तो
ये
लगता
है
जैसे
तुम्हारे
साथ
धोखा
कर
रहा
हूँ
Shariq Kaifi
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छोड़
कर
हम
सुकून-ए-दिल
अपना
चल
पड़े
फिर
से
शोर
की
जानिब
Irshad 'Arsh'
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जिसे
देखो
यहाँ
दुख
दर्द
के
क़िस्से
सुनाता
है
मियाँ
क़ैद-ए-मशक़्क़त
है
कोई
जन्नत
नहीं
है
ये
Irshad 'Arsh'
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खुशबुएँ
लूटने
वाला
भी
वही
ठहरा
है
जो
कि
मामूर
था
गुलशन
की
हिफ़ाज़त
के
लिए
Irshad 'Arsh'
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हम
कभी
चांँद
की
मानिंद
हुआ
करते
थे
अब
उन्हें
चाँद
में
भी
दाग़
नज़र
आते
हैं
Irshad 'Arsh'
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मेरी
दुनिया
से
चाहत
घट
रही
है
मैं
दलदल
से
निकलता
जा
रहा
हूँ
Irshad 'Arsh'
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