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Irshad 'Arsh'
chhod kar ham sukoon-e-dil apna
chhod kar ham sukoon-e-dil apna | छोड़ कर हम सुकून-ए-दिल अपना
- Irshad 'Arsh'
छोड़
कर
हम
सुकून-ए-दिल
अपना
चल
पड़े
फिर
से
शोर
की
जानिब
- Irshad 'Arsh'
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'अख़्तर'
गुज़रते
लम्हों
की
आहट
पे
यूँँ
न
चौंक
इस
मातमी
जुलूस
में
इक
ज़िंदगी
भी
है
Akhtar Hoshiyarpuri
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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आज
फिर
कुफ़्र
कमाया
हमने
शोर
को
शे'र
सुनाया
हमने
Vishal Bagh
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अभी
तो
शाम
की
दस्तक
हुई
है
अभी
से
लग
गया
बिस्तर
हमारा
यही
तन्हाई
है
जन्नत
हमारी
इसी
जन्नत
में
है
अब
घर
हमारा
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Vikas Sharma Raaz
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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हम
किसी
दर
पे
न
ठिटके
न
कहीं
दस्तक
दी
सैकड़ों
दर
थे
मिरी
जाँ
तिरे
दर
से
पहले
Ibn E Insha
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वो
शांत
बैठा
है
कब
से
मैं
शोर
क्यूँँॅं
न
करूँॅं
बस
एक
बार
वो
कह
दे
कि
चुप
तो
चूँ
न
करूँॅं
Charagh Sharma
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मेरा
दस्तक
देना
इतना
अच्छा
लगता
है
उसको
दस्तक
देना
बंद
करूँँ
तो
दरवाज़ा
खुल
जाता
है
Vishnu virat
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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बहुत
पहले
से
उन
क़दमों
की
आहट
जान
लेते
हैं
तुझे
ऐ
ज़िंदगी
हम
दूर
से
पहचान
लेते
हैं
Firaq Gorakhpuri
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मेरी
दुनिया
से
चाहत
घट
रही
है
मैं
दलदल
से
निकलता
जा
रहा
हूँ
Irshad 'Arsh'
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ज़िंदगी
और
कुछ
नहीं
मुझको
साथ
चलने
का
हौसला
तो
दे
Irshad 'Arsh'
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याद
है
मुझ
को
तेरे
साथ
वो
बारिश
का
सफ़र
अब
अकेला
हूँ
मगर
ख़ैर
कोई
बात
नहीं
Irshad 'Arsh'
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वो
मोहब्बत
में
गिरफ़्तार
हो
भी
सकता
है
आदमी
है
तो
गुनहगार
हो
भी
सकता
है
वक़्त
के
साथ
बदलते
हुऐ
देखा
है
उसे
आज
दुश्मन
है
तो
कल
यार
हो
भी
सकता
है
नया
किरदार
कहानी
में
उतर
आया
तो
ख़त्म
देखो
मेरा
क़िरदार
हो
भी
सकता
है
हाकि
में
वक़्त
की
जो
मैंने
शिकायत
की
है
अब
मुख़ालिफ़
मेरा
अख़बार
हो
भी
सकता
है
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Irshad 'Arsh'
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हम
चराग़ों
से
जलने
वाले
लोग
रोशनी
में
दिखाई
क्यूँँंँ
देंगे
Irshad 'Arsh'
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