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Irshad 'Arsh'
ham charaaghon se jalne waale log
ham charaaghon se jalne waale log | हम चराग़ों से जलने वाले लोग
- Irshad 'Arsh'
हम
चराग़ों
से
जलने
वाले
लोग
रोशनी
में
दिखाई
क्यूँँंँ
देंगे
- Irshad 'Arsh'
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हमारे
लोग
अगर
रास्ता
न
पाएँगे
शिलाएँ
जोड़
के
पानी
पे
पुल
बनाएँगे
फिर
एक
बार
मनेगी
अवध
में
दीवाली
फिर
एक
बार
सभी
रौशनी
में
आएँगे
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Amit Jha Rahi
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धूप
ये
अठखेलियाँ
हर
रोज़
करती
है
एक
छाया
सीढ़ियाँ
चढ़ती
उतरती
है
यह
दिया
चौरास्ते
का
ओट
में
ले
लो
आज
आँधी
गाँव
से
हो
कर
गुज़रती
है
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Dushyant Kumar
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सभी
के
दीप
सुंदर
हैं
हमारे
क्या
तुम्हारे
क्या
उजाला
हर
तरफ़
है
इस
किनारे
उस
किनारे
क्या
Hafeez Banarasi
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वो
सर्दियों
की
धूप
की
तरह
ग़ुरूब
हो
गया
लिपट
रही
है
याद
जिस्म
से
लिहाफ़
की
तरह
Musavvir Sabzwari
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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जली
हैं
धूप
में
शक्लें
जो
माहताब
की
थीं
खिंची
हैं
काँटों
पे
जो
पत्तियाँ
गुलाब
की
थीं
Dagh Dehlvi
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रौशनी
आधी
इधर
आधी
उधर
इक
दिया
रक्खा
है
दीवारों
के
बीच
Obaidullah Aleem
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झूट
पर
उसके
भरोसा
कर
लिया
धूप
इतनी
थी
कि
साया
कर
लिया
Shariq Kaifi
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मैं
बे-ख़याल
कभी
धूप
में
निकल
आऊँ
तो
कुछ
सहाब
मिरे
साथ
साथ
चलते
हैं
Farhat Abbas Shah
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तुम
तो
सर्दी
की
हसीं
धूप
का
चेहरा
हो
जिसे
देखते
रहते
हैं
दीवार
से
जाते
हुए
हम
Nomaan Shauque
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कुछ
न
करने
के
सौ
बहाने
हैं
करना
चाहो
तो
क्या
नहीं
होता
Irshad 'Arsh'
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वो
मोहब्बत
में
गिरफ़्तार
हो
भी
सकता
है
आदमी
है
तो
गुनहगार
हो
भी
सकता
है
वक़्त
के
साथ
बदलते
हुऐ
देखा
है
उसे
आज
दुश्मन
है
तो
कल
यार
हो
भी
सकता
है
नया
किरदार
कहानी
में
उतर
आया
तो
ख़त्म
देखो
मेरा
क़िरदार
हो
भी
सकता
है
हाकि
में
वक़्त
की
जो
मैंने
शिकायत
की
है
अब
मुख़ालिफ़
मेरा
अख़बार
हो
भी
सकता
है
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Irshad 'Arsh'
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ज़ख़्म
को
मत
निचोड़
जाने
दे
तू
न
समझेगा
छोड़
जाने
दे
Irshad 'Arsh'
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देखा
है
अभी
तुम
ने
तुम
ने
अभी
जाना
है
लेकिन
ये
ज़माने
का
अंदाज़
पुराना
है
क्या
कार-ए-अज़ीयत
है
करना
उसे
रुख़्सत
भी
आँसू
भी
छुपाने
हैं
हँसकर
भी
दिखाना
है
इस
बज़्म-ए-मोहब्बत
में
कुछ
देर
ज़रा
ठहरो
किस
बात
की
जल्दी
है
आख़िर
कहाँ
जाना
है
कुछ
और
कहा
होता
तो
मान
भी
जाता
दिल
पर
तुम
ने
बनाया
जो
कॉमन
सा
बहाना
है
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Irshad 'Arsh'
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हम
कभी
चांँद
की
मानिंद
हुआ
करते
थे
अब
उन्हें
चाँद
में
भी
दाग़
नज़र
आते
हैं
Irshad 'Arsh'
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