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Irshad 'Arsh'
shaayad ki isliye bhi sukhanvar hua hooñ main
shaayad ki isliye bhi sukhanvar hua hooñ main | शायद कि इसलिए भी सुख़न-वर हुआ हूँ मैं
- Irshad 'Arsh'
शायद
कि
इसलिए
भी
सुख़न-वर
हुआ
हूँ
मैं
मेरी
कभी
बनी
ही
नहीं
ज़िंदगी
के
साथ
- Irshad 'Arsh'
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तुम्हारी
ज़िंदगी
में
तुम
हमेशा
मुझे
हर
आदमी
में
सुन
सकोगी
सुनोगी
जब
कभी
भी
शे'र
मेरे
तो
ख़ुद
को
शा'इरी
में
सुन
सकोगी
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Sanskar 'Sanam'
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कटती
है
आरज़ू
के
सहारे
पे
ज़िंदगी
कैसे
कहूँ
किसी
की
तमन्ना
न
चाहिए
Shaad Arfi
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मौत
का
भी
इलाज
हो
शायद
ज़िंदगी
का
कोई
इलाज
नहीं
Firaq Gorakhpuri
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Ahsan Marahravi
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बहुत
हसीन
सही
सोहबतें
गुलों
की
मगर
वो
ज़िंदगी
है
जो
काँटों
के
दरमियाँ
गुज़रे
Jigar Moradabadi
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ज़ख़्म
जो
तुम
ने
दिया
वो
इस
लिए
रक्खा
हरा
ज़िंदगी
में
क्या
बचेगा
ज़ख़्म
भर
जाने
के
बाद
Azm Shakri
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ज़िंदगी
एक
फ़न
है
लम्हों
को
अपने
अंदाज़
से
गँवाने
का
Jaun Elia
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इस
ज़िन्दगी
में
इतनी
फ़राग़त
किसे
नसीब
इतना
न
याद
आ
कि
तुझे
भूल
जाएँ
हम
Ahmad Faraz
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ज़िंदगी
है
या
कोई
तूफ़ान
है
हम
तो
इस
जीने
के
हाथों
मर
चले
Khwaja Meer Dard
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छोड़कर
तन्हा
मुझे
जन्नत
में
रहने
लग
गए
हो
और
मैंने
ज़िन्दगीं
कर
ली
जहन्नम
शा'इरी
में
"Nadeem khan' Kaavish"
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किसी
का
आइना
हो
करके
देखो
मियाँ
सच
बोलना
आसाँ
नहीं
है
Irshad 'Arsh'
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कोई
दौलत
के
लिए
है
कोई
शोहरत
के
लिए
हम
भी
मशहूर-ए-ज़माना
हैं
शराफ़त
के
लिए
Irshad 'Arsh'
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जिसे
देखो
यहाँ
दुख
दर्द
के
क़िस्से
सुनाता
है
मियाँ
क़ैद-ए-मशक़्क़त
है
कोई
जन्नत
नहीं
है
ये
Irshad 'Arsh'
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देखा
है
अभी
तुम
ने
तुम
ने
अभी
जाना
है
लेकिन
ये
ज़माने
का
अंदाज़
पुराना
है
क्या
कार-ए-अज़ीयत
है
करना
उसे
रुख़्सत
भी
आँसू
भी
छुपाने
हैं
हँसकर
भी
दिखाना
है
इस
बज़्म-ए-मोहब्बत
में
कुछ
देर
ज़रा
ठहरो
किस
बात
की
जल्दी
है
आख़िर
कहाँ
जाना
है
कुछ
और
कहा
होता
तो
मान
भी
जाता
दिल
पर
तुम
ने
बनाया
जो
कॉमन
सा
बहाना
है
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Irshad 'Arsh'
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छोटी
सी
ज़िंदगी
है
गुज़ारो
ख़ुशी
के
साथ
अपना
मुवाज़ना
नहीं
करते
किसी
के
साथ
या
रब
मेरे
नसीब
में
कुछ
माल-ओ-ज़र
भी
हो
कब
तक
जि
यूँँगा
ऐसे
भला
मुफ़लिसी
के
साथ
शायद
कि
इसलिए
भी
सुख़न-वर
हुआ
हूँ
मैं
मेरी
कभी
बनी
ही
नहीं
ज़िंदगी
के
साथ
'इरशाद'
इक
वो
शख़्स
कि
जिस
पर
यक़ीन
था
वो
भी
निकल
चुका
है
सफ़र
पर
किसी
के
साथ
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