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Neeraj Neer
aaj phir bete ko maa jaahil lagii hai
aaj phir bete ko maa jaahil lagii hai | आज फिर बेटे को माँ जाहिल लगी है
- Neeraj Neer
आज
फिर
बेटे
को
माँ
जाहिल
लगी
है
सोचिए
क्या
सीखा
हमने
डिग्रियों
से
- Neeraj Neer
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खिलौनों
की
तरफ़
बच्चे
को
माँ
जाने
नहीं
देती
मगर
आगे
खिलौनों
की
दुकाँ
जाने
नहीं
देती
Munawwar Rana
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एक
मुद्दत
से
मिरी
माँ
नहीं
सोई
'ताबिश'
मैं
ने
इक
बार
कहा
था
मुझे
डर
लगता
है
Abbas Tabish
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जब
भी
कश्ती
मिरी
सैलाब
में
आ
जाती
है
माँ
दु'आ
करती
हुई
ख़्वाब
में
आ
जाती
है
Munawwar Rana
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कौन
सी
बात
कहाँ
कैसे
कही
जाती
है
ये
सलीक़ा
हो
तो
हर
बात
सुनी
जाती
है
एक
बिगड़ी
हुई
औलाद
भला
क्या
जाने
कैसे
माँ-बाप
के
होंठों
से
हँसी
जाती
है
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Waseem Barelvi
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इक
लड़की
है
जो
इकदम
घर
जैसी
है
वो
बिल्कुल
माँ
जैसी
बातें
करती
है
Siddharth Saaz
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हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
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Tanoj Dadhich
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अश्क
माँ
के
जो
ख़ुशी
से
गिरे
तो
हैं
मोती
और
छलके
जो
ग़मों
से
तो
लहू
हो
जाए
S M Afzal Imam
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बूढ़ी
माँ
का
शायद
लौट
आया
बचपन
गुड़ियों
का
अम्बार
लगा
कर
बैठ
गई
Irshad Khan Sikandar
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चलती
फिरती
हुई
आँखों
से
अज़ाँ
देखी
है
मैं
ने
जन्नत
तो
नहीं
देखी
है
माँ
देखी
है
Munawwar Rana
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घर
में
झीने
रिश्ते
मैंने
लाखों
बार
उधड़ते
देखे
चुपके
चुपके
कर
देती
है
जाने
कब
तुरपाई
अम्मा
Aalok Shrivastav
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ठीक
है
मैं
फेर
लेता
हूँ
नज़र
को
तुम
भी
झुमके
से
कहो
गर्दन
न
चू
में
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Neeraj Neer
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टूटना
देखते
हैं
तारों
का
घर
कहाँ
होगा
बेसहारों
का
हर
किसी
का
कोई
न
कोई
है
सोचकर
देखिए
किनारों
का
आप
तो
देख
भी
नहीं
सकते
नाम
क्या
लेंगे
हम
चमारों
का
पाँव
के
साथ
आँख
पर
छाले
कौन
समझेगा
दुख
कहारों
का
उसने
बाहें
गले
में
डाली
है
क्या
ही
करना
है
इन
बहारों
का
नाक
छिदवा
लिया
है
लड़की
ने
बढ़
गया
काम
अब
सुनारों
का
नीरज
नीर
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Neeraj Neer
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सेठ
बस
साँसें
हैं
उस
बेवा
की
गिरवी
रखने
को
यूँँ
भी
क्या
बचता
है
मंगलसूत्र
को
दे
देने
से
Neeraj Neer
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ख़ुद
को
शीशा
कर
लिया
है
यार
मैंने
अब
तो
तेरा
देखना
बनता
है
मुझ
को
Neeraj Neer
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ज़िन्दगी
का
ज़ाएका
अब
हम
से
पूछो
उस
के
लब
चू
में
हैं
सो
मीठा
लगेगा
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Neeraj Neer
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