tanj ke patthar musalsal ham pe barsaate rahe | तंज़ के पत्थर मुसलसल हम पे बरसाते रहे

  - Ikramullah Khan Azhar
तंज़केपत्थरमुसलसलहमपेबरसातेरहे
कुछकरमअहबाबअपनेयूँँभीफ़रमातेरहे
इश्क़काइल्ज़ामतन्हाक्यूँरहेमेरेहीसर
दम-ब-दमतुमभीतोमेरीराहमेंआतेरहे
शोरमेंआवाज़उनकीकोईभीसुनताथा
भीड़मेंकितनेगदागरहाथफैलातेरहे
आपनेशायदहमाराहौसलादेखानहीं
ज़ख़्मखाकरदोस्तोंपरफूलबरसातेरहे
ग़ैरमुमकिनथाज़मानेमेंमिरेदिलकाइलाज
जानेक्याक्याकहकेहमकोलोगबहलातेरहे
उसकीयादोंसेसजाईअपनीबज़्म-ए-आरज़ू
दिलकोतन्हाईमें'अज़हर'यूँँभीबहलातेरहे
  - Ikramullah Khan Azhar
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