qayamat ki tadap gham intiha ka | क़यामत की तड़प ग़म इंतिहा का

  - Ikramullah Khan Azhar
क़यामतकीतड़पग़मइंतिहाका
सिलाहमकोमिलाहैयेवफ़ाका
भरमटूटानहींमेरीअनाका
अभीतकफ़ज़्लहैअज़हरख़ुदाका
हमेंफिरख़ौफ़क्यारोज़-ए-जज़ाका
वसीलाहैमोहम्मदमुस्तफ़ाका
सँभलकरकीजिएगागुफ़्तुगूभी
मुख़ालिफ़आज-कलहैरुख़हवाका
मज़ाआनेलगाहैदर्ददिलमें
असरशायदहैयेमेरीदु'आका
कोईख़ाइफ़उसकोकरसकेगा
जोदामनथामलेमुश्किल-कुशाका
जहाँसचबोलनाहैजुर्म'अज़हर'
वहाँक्याकामहैअहल-ए-सफ़ाका
  - Ikramullah Khan Azhar
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