ik akhgar-e-jamaal farozaan b-shakl-e-dil | इक अख़्गर-ए-जमाल फ़रोज़ाँ ब-शक्ल-ए-दिल

  - Ijtiba Rizvi
इकअख़्गर-ए-जमालफ़रोज़ाँब-शक्ल-ए-दिल
फेंकाइधरभीहुस्न-ए-तजल्ली-निसारने
अफ़्सुर्दगीभीहुस्नहैताबिंदगीभीहुस्न
हमकोख़िज़ाँनेतुमकोसँवाराबहारने
इसदिलकोशौक़-ए-दीदमेंतड़पाकेकरदिया
क्याउस्तुवारवा'दा-ए-ना-उस्तवारने
जल्वेकीभीकदेकेवोहटनेलगेथेख़ुद
दामनपकड़लियानिगह-ए-ए'तिबारने
गेसूग़ुबार-ए-राह-ए-तमन्नासेअटजाएँ
सहरामेंआपनिकलेहैंहमकोपुकारने
  - Ijtiba Rizvi
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