churaane ko chura laaya main jalwe roo-e-raushan se | चुराने को चुरा लाया मैं जल्वे रू-ए-रौशन से

  - Ijtiba Rizvi
चुरानेकोचुरालायामैंजल्वेरू-ए-रौशनसे
मगरअबबिजलियाँलिपटीहुईहैंदिलकेदामनसे
तनव्वोकुछतोहोबुलबुल-ए-कम-ज़ौक़मातमक्या
अगरतामीर-ए-सहराहोगईतख़रीबगुलशनसे
मुझेकुछतजरबेहररंगकेझोलीमेंरखचलना
मुसाफ़िरहूँग़रज़क्याहैमुझेसहरागुलशनसे
मुझेहरकारवाँसेछूटनाइसबद-गुमानीमें
किशायदराहबरकोरब्त-ए-पिन्हानीहोरहज़नसे
मज़ाक़-ए-जज़्ब-ए-बातिनगुमहैअबतज़ईन-ए-ज़ाहिरमें
येतिफ़्ल-ए-दश्त-ए-ऐमनघटगयातहज़ीब-ए-गुलशनसे
  - Ijtiba Rizvi
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