zehn-o-dil men hai jang ya kuchh aur | ज़ेहन-ओ-दिल में है जंग या कुछ और

  - Iftikhar Raghib
ज़ेहन-ओ-दिलमेंहैजंगयाकुछऔर
होरहाहूँमलंगयाकुछऔर
हालक्याहोगयासमाअ'तका
तेरीबातेंथींसंगयाकुछऔर
कोईउतराहैझीलमेंदिलकी
उठरहीहैतरंगयाकुछऔर
तेरेहाथोंमेंडोरहैयादिल
होगयाहूँपतंगयाकुछऔर
कोशिशेंराएगाँमनानेकी
मुझकोहीथाढंगयाकुछऔर
मुश्किलेंरोज़बढ़तीजातीहैं
वोसितमगरहैतंगयाकुछऔर
दिलमेंहैआसआरज़ूवहशत
बे-क़रारीउमंगयाकुछऔर
हौसलेमेरेमिस्लकोहहुए
तेरीचाहतहैसंगयाकुछऔर
मेरेशे'रोंपेहोगएसाकित
यारमेरेहैंदंगयाकुछऔर
उनकेहाथोंमेंआज-कल'राग़िब'
हैरिफ़ाक़तकारंगयाकुछऔर
  - Iftikhar Raghib
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