chashm-e-tar ko zabaan kar baithe | चश्म-ए-तर को ज़बान कर बैठे

  - Iftikhar Raghib
चश्म-ए-तरकोज़बानकरबैठे
हालदिलकाबयानकरबैठे
तुमनेरस्मनमुझेसलामकिया
लोगक्याक्यागुमानकरबैठे
एकपलभीकहाँसुकूनमिला
आपकोजबसेजानकरबैठे
पस्तियोंमेंकभीगिराडाला
औरकभीआसमानकरबैठे
आसकीशम्अटिमटिमातीरही
हमकहाँहारमानकरबैठे
एकपलकायक़ींनहीं'राग़िब'
इकसदीकाप्लानकरबैठे
  - Iftikhar Raghib
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