chashm-e-dil jis ki raah takti hai | चश्म-ए-दिल जिस की राह तकती है

  - Iftikhar Raghib
चश्म-ए-दिलजिसकीराहतकतीहै
अबवोबिजलीकहाँचमकतीहै
देरलगतीहैजिसकोजलनेमें
आगवोदेरतकदहकतीहै
तुझसेमिलनेकीआसकीचिड़ियासहन-ए-दिलमेंबहुतचहकतीहै
दिलदहलताहैदूसरीकाभी
एकदीवारजबदरकतीहै
छुपनेवालीनहींमिरीचाहत
तेरीआँखोंमेंजोचमकतीहै
तिश्नगीमेरीजिससेहैमंसूब
वोसुराहीकहाँछलकतीहै
जानेकबवोकरेंवफ़ादिलसे
रोज़चश्म-ए-वफ़ाफड़कतीहै
जलनेवालोंसेकोईक्यापूछे
क्यूँउन्हेंरौशनीखटकतीहै
आसटूटीतोसाथही'राग़िब'
साँसकीडोरटूटसकतीहै
  - Iftikhar Raghib
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