vo mila mujh ko na jaane khol kaisa odh kar | वो मिला मुझ को न जाने ख़ोल कैसा ओढ़ कर

  - Iftikhar Naseem
वोमिलामुझकोजानेख़ोलकैसाओढ़कर
रौशनीगुमहोगईअपनाहीसायाओढ़कर
नींदसेबोझहैंपत्तेऊँघतेसेपेड़हैं
शहरसोयाहैख़मोशीकालबादाओढ़कर
ढूँढताफिरताथामैंहरशख़्सकेअसलीनुक़ूश
लोगमिलतेथेमुझेचेहरेपेचेहराओढ़कर
मुंजमिदसाहोगयाहूँख़ुनकी-ए-एहसाससे
धूपभीनिकलीहैलेकिनतनपेकपड़ाओढ़कर
रंगसारेधोगयाहैरातकाबादल'नसीम'
औरघरनंगेहुएपानीबरसताओढ़कर
  - Iftikhar Naseem
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