अंदलीबोंसेकभीगुलसेकभीलेताहूँ
अज़्म-ए-बर्दाश्तदम-ए-तिश्ना-लबीलेताहूँ
तंज़कीसर्दहवाएँजोसतातीहैंमुझे
शिद्दत-ए-गर्मी-ए-एहसासकोपीलेताहूँ
ज़िंदगीबाक़ीभीअपनोंमेंगुज़रजाएगी
इसलिएतल्ख़ी-ए-हालातकोपीलेताहूँ
मुझपेसबलोगगुनहडालदियाकरतेहैं
किसलिएकिसकेलिएदरिया-दिलीलेताहूँ
इंकिसारीनेमुझेइतनीबुलंदीदीहै
भूलकरभीनकभीराह-ए-ख़ुदीलेताहूँ