us shaam vo ruksat ka samaan yaad rahega | उस शाम वो रुख़्सत का समाँ याद रहेगा

  - Ibn E Insha
उसशामवोरुख़्सतकासमाँयादरहेगा
वोशहरवोकूचावोमकाँयादरहेगा
वोटीसकिउभरीथीइधरयादरहेगी
वोदर्दकिउट्ठाथायहाँयादरहेगा
हमशौक़केशोलेकीलपकभूलभीजाएँ
वोशम-ए-फ़सुर्दाकाधुआँयादरहेगा
हाँबज़्म-ए-शबानामेंहमा-शौक़जोउसदिन
हमथेतिरीजानिबनिगराँयादरहेगा
कुछ'मीर'केअबयातथेकुछ'फ़ैज़'केमिसरे
इकदर्दकाथाजिनमेंबयाँयादरहेगा
आँखोंमेंसुलगतीहुईवहशतकेजिलौमें
वोहैरतहसरतकाजहाँयादरहेगा
जाँ-बख़्शसीउसबर्ग-ए-गुल-ए-तरकीतरावत
वोलम्स-ए-अज़ीज़-ए-दो-जहाँयादरहेगा
हमभूलसकेहैंतुझेभूलसकेंगे
तूयादरहेगाहमेंहाँयादरहेगा
  - Ibn E Insha
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