kuchh kehne ka vaqt nahin ye kuchh na kaho KHaamosh raho | कुछ कहने का वक़्त नहीं ये कुछ न कहो ख़ामोश रहो

  - Ibn E Insha
कुछकहनेकावक़्तनहींयेकुछकहोख़ामोशरहो
लोगोंख़ामोशरहोहाँलोगोंख़ामोशरहो
सचअच्छापरउसकेजिलौमेंज़हरकाहैइकप्यालाभी
पागलहोक्यूँँनाहक़कोसुक़रातबनोख़ामोशरहो
उनकायेकहनासूरजहीधरतीकेफेरेकरताहै
सर-आँखोंपरसूरजहीकोघूमनेदोख़ामोशरहो
महबसमेंकुछहब्सहैऔरज़ंजीरकाआहनचुभताहै
फिरसोचोहाँफिरसोचोहाँफिरसोचोख़ामोशरहो
गर्मआँसूऔरठंडीआहेंमनमेंक्याक्यामौसमहैं
इसबगियाकेभेदखोलोसैरकरोख़ामोशरहो
आँखेंमूँदकिनारेबैठोमनकेरक्खोबंदकिवाड़
'इंशा'-जीलोधागालोऔरलबसीलोख़ामोशरहो
  - Ibn E Insha
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