aur to koi bas na chalega hijr ke dard ke maaron ka | और तो कोई बस न चलेगा हिज्र के दर्द के मारों का

  - Ibn E Insha
औरतोकोईबसचलेगाहिज्रकेदर्दकेमारोंका
सुब्हकाहोनादूभरकरदेंरस्तारोकसितारोंका
झूटेसिक्कोंमेंभीउठादेतेहैंयेअक्सरसच्चामाल
शक्लेंदेखकेसौदेकरनाकामहैइनबंजारोंका
अपनीज़बाँसेकुछकहेंगेचुपहीरहेंगे'आशिक़लोग
तुमसेतोइतनाहोसकताहैपूछोहालबेचारोंका
जिसजिप्सीकाज़िक्रहैतुमसेदिलकोउसीकीखोजरही
यूँँतोहमारेशहरमेंअक्सरमेलालगानिगारोंका
एकज़रासीबातथीजिसकाचर्चापहुँचागलीगली
हमगुमनामोंनेफिरभीएहसानमानायारोंका
दर्दकाकहनाचीख़हीउठोदिलकाकहनावज़्अ'निभाओ
सबकुछसहनाचुपचुपरहनाकामहैइज़्ज़त-दारोंका
'इंशा'जीअबअजनबियोंमेंचैनसेबाक़ीउम्रकटे
जिनकीख़ातिरबस्तीछोड़ीनामलोउनप्यारोंका
  - Ibn E Insha
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