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Shivam Mishra
khabar ye shahar ko bhi thii ki miTTi ka hai ghar meraa
khabar ye shahar ko bhi thii ki miTTi ka hai ghar meraa | ख़बर ये शहर को भी थी कि मिट्टी का है घर मेरा
- Shivam Mishra
ख़बर
ये
शहर
को
भी
थी
कि
मिट्टी
का
है
घर
मेरा
यूँँ
ही
बारिश
नहीं
माँगी
ज़माने
ने
दु'आओं
में
- Shivam Mishra
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मैं
कि
काग़ज़
की
एक
कश्ती
हूँ
पहली
बारिश
ही
आख़िरी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
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ज़ब्त
करो
गर
ग़म
के
बादल
छाए
हैं,
रक़्स
करो
के
बारिश
आने
वाली
है
Darpan
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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बहुत
मुद्दत
के
बा'द
आई
है
बारिश
और
उस
ज़ालिम
के
पेपर
चल
रहे
हैं
Ahmad Farhad
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बाजी
बदी
थी
उसने
मेरे
चश्मे-तर
के
साथ
आख़िर
को
हार
हार
के
बरसात
रह
गई
Khwaja Meer Dard
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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बारिश
हो
जाने
के
बाद
भी
मिट्टी
गीली
रहती
है
मैं
तेरे
जाने
के
बाद
भी
तुझ
सेे
बातें
करता
हूँ
Siddharth Saaz
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उस
ने
बारिश
में
भी
खिड़की
खोल
के
देखा
नहीं
भीगने
वालों
को
कल
क्या
क्या
परेशानी
हुई
Jamal Ehsani
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उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वगैरा
करती
है
बारिश
मेरे
रब
की
ऐसी
नेमत
है
रोने
में
आसानी
पैदा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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धूप
तो
धूप
ही
है
इसकी
शिकायत
कैसी
अब
की
बरसात
में
कुछ
पेड़
लगाना
साहब
Nida Fazli
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वसिय्यत
में
मिली
है
दुश्मनी
हमको
यहाँ
साहब
नहीं
चर्चे
थे
कम
वर्ना
हमारी
दोस्ती
के
भी
Shivam Mishra
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नसीहत
तो
क़िस्मत
को
देनी
है
अब
उसे
शक
है
मेहनत
पे
शायद
मेरी
Shivam Mishra
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ज़िन्दगी
हमें
जब
उलझन
तमाम
देती
है
मौत
चैन
का
फिर
दे
इक
पयाम
देती
है
Shivam Mishra
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बहुत
गहरा
हूँ
मैं
बोलो
कहाँ
तक
जाना
चाहोगे
है
बेहतर
ये
किनारा
कर
लो
वर्ना
डूब
जाओगे
Shivam Mishra
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मैं
उसे
अब
तो
पाना
नहीं
चाहता
राह
में
उसकी
आना
नहीं
चाहता
ठोकरें
मैं
बहुत
खा
चुका
हूँ
यहाँ
अब
कभी
टूट
जाना
नहीं
चाहता
वो
न
मेरा
रहा
मैं
न
उसका
रहा
अब
बहाने
बनाना
नहीं
चाहता
मैंने
की
थी
वफ़ा
वो
रहा
बे-वफ़ा
और
कुछ
भी
बताना
नहीं
चाहता
मैंने
सब
कुछ
सहा
और
कुछ
नईं
कहा
और
आँसू
बहाना
नहीं
चाहता
अब
सफ़र
में
कहीं
खो
न
जाऊँ
'शिवम्'
मंजिलों
तक
जो
जाना
नहीं
चाहता
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Shivam Mishra
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