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Hrishita Singh
kitna aasaan tha tere bin zindagi kaatna
kitna aasaan tha tere bin zindagi kaatna | कितना आसान था तेरे बिन ज़िंदगी काटना
- Hrishita Singh
कितना
आसान
था
तेरे
बिन
ज़िंदगी
काटना
और
फिर
तेरी
यादों
ने
जीना
भी
मुश्किल
किया
- Hrishita Singh
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हम
भी
क्या
ज़िंदगी
गुज़ार
गए
दिल
की
बाज़ी
लगा
के
हार
गए
Dagh Dehlvi
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तल्ख़ियाँ
इस
में
बहुत
कुछ
हैं
मज़ा
कुछ
भी
नहीं
ज़िंदगी
दर्द-ए-मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
Kaleem Aajiz
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ज़िंदगी
और
चल
नहीं
सकती
आने
पे
मौत
टल
नहीं
सकती
Afzal Sultanpuri
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क्या
ख़ुशी
में
ज़िंदगी
का
होश
कम
रह
जाएगा
ग़म
अगर
मिट
भी
गया
एहसास-ए-ग़म
रह
जाएगा
Shakeel Badayuni
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वो
मेरी
ज़िन्दगी
का
आख़िरी
ग़म
था
उसी
ने
मुझको
ख़ुश
रहना
सिखाया
है
Sapna Moolchandani
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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कुछ
दिन
से
ज़िंदगी
मुझे
पहचानती
नहीं
यूँँ
देखती
है
जैसे
मुझे
जानती
नहीं
Anjum Rehbar
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जो
गुज़ारी
न
जा
सकी
हम
से
हम
ने
वो
ज़िन्दगी
गुज़ारी
है
Jaun Elia
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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हम
सेे
मत
पूछो
हाल
ए
दिल
हमारा
अब
अब
हमारी
तबीअत
अच्छी
ख़ासी
है
Hrishita Singh
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वो
फ़ुर्क़त
अदा
कर
रहे
हैं
हम
अब
भी
वफा
कर
रहे
हैं
Hrishita Singh
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वो
अर्से
के
बाद
फिर
मिले
मुझको
यूँँ
सफ़्हे
में
गुलाब
जैसे
पाया
जाए
Hrishita Singh
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कौन
रहता
ख़फ़ा
इतनी
सी
बात
पर
जीना
ही
कर
दिया
बार
इसी
बात
पर
मैं
ख़फ़ा
हूँ
अभी
उस
सेे
जिस
बात
पर
वो
भी
मुझ
सेे
ख़फ़ा
है
उसी
बात
पर
चाहती
हूँ
के
अब
मसअला
हल
हो,
वो
चाहता
है
लड़ाई
किसी
बात
पर
रंजिशें
मैं
मिटाती
रही
ज़ेहन
से
ताने
वो
दे
रहा
है
इसी
बात
पर
कहना
अबकी
लगाएगा
मुझको
गले
मुस्कुरा
वो
रहा
था
इसी
बात
पर
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Hrishita Singh
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इस
जहाँ
में
ये
दिल
न
आबाद
होगा
इस
जहाँ
की
मुझको
ज़रूरत
नहीं
है
Hrishita Singh
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