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Hrishita Singh
kabhi to zindagi men haadson ka naam raha
kabhi to zindagi men haadson ka naam raha | कभी तो ज़िंदगी में हादसों का नाम रहा
- Hrishita Singh
कभी
तो
ज़िंदगी
में
हादसों
का
नाम
रहा
कभी
तो
ज़िंदगी
ही
हादसों
के
नाम
हुई
- Hrishita Singh
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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क्यूँ
डरें
ज़िन्दगी
में
क्या
होगा
कुछ
न
होगा
तो
तजरबा
होगा
Javed Akhtar
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गँवाई
किस
की
तमन्ना
में
ज़िंदगी
मैं
ने
वो
कौन
है
जिसे
देखा
नहीं
कभी
मैं
ने
Jaun Elia
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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तंग
आ
चुके
हैं
कशमकश-ए-ज़िंदगी
से
हम
ठुकरा
न
दें
जहाँ
को
कहीं
बे-दिली
से
हम
Sahir Ludhianvi
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जब
से
हुआ
है
कंधे
से
बस्ते
का
बोझ
कम
बढ़ते
ही
जा
रहे
हैं
मेरी
ज़िंदगी
में
ग़म
Ankit Maurya
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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हम
हैं
ना!
ये
जो
मुझ
सेे
कहते
हैं
ख़ुद
किसी
और
के
भरोसे
हैं
ज़िंदगी
के
लिए
बताओ
कुछ
ख़ुद-कुशी
के
तो
सौ
तरीक़े
हैं
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Vikram Gaur Vairagi
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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अब
मुक़द्दर
में
ही
नहीं
साथ
तेरा
कुछ
दु'आओं
में
मेरी
ताकत
नहीं
है
Hrishita Singh
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कौन
रहता
ख़फ़ा
इतनी
सी
बात
पर
जीना
ही
कर
दिया
बार
इसी
बात
पर
मैं
ख़फ़ा
हूँ
अभी
उस
सेे
जिस
बात
पर
वो
भी
मुझ
सेे
ख़फ़ा
है
उसी
बात
पर
चाहती
हूँ
के
अब
मसअला
हल
हो,
वो
चाहता
है
लड़ाई
किसी
बात
पर
रंजिशें
मैं
मिटाती
रही
ज़ेहन
से
ताने
वो
दे
रहा
है
इसी
बात
पर
कहना
अबकी
लगाएगा
मुझको
गले
मुस्कुरा
वो
रहा
था
इसी
बात
पर
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Hrishita Singh
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इक
तो
उसकी
ऐसी
मतवाली
आँखें
तौबा
उस
पर
वो
बातें
भी
तो
ऐसी
ही
करता
है
Hrishita Singh
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दिल
कुशादा
है
अब
भी
उनकी
ही
ख़ातिर
दिल
पे
गुज़री
कोई
क़यामत
नहीं
है
Hrishita Singh
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रफ़ाक़त
है
दिल
जू
न
कर
जो
सब
करते
हैं
तू
न
कर
Hrishita Singh
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