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Hrishita Singh
ab kahaan koii deewana hota uske ishq men
ab kahaan koii deewana hota uske ishq men | अब कहाँ कोई दिवाना होता उसके इश्क़ में
- Hrishita Singh
अब
कहाँ
कोई
दिवाना
होता
उसके
इश्क़
में
अब
तो
यूँँ
ही
रह
गया
है
जैसे
कोई
क़िस्सा
इश्क़
- Hrishita Singh
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मेरी
तस्वीरें
जला
दो
साहिबा
और
फिर
शम्मा
बुझा
दो
साहिबा
एक
क़िस्सा
एक
लड़का
और
तुम
अब
तो
मुझ
को
चुप
करा
दो
साहिबा
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Anand Raj Singh
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जमाना
भूल
पायेगा
नहीं
अपनी
मुहब्बत
छपेंगे
क्लास
दसवीं
में
सभी
किस्से
हमारे
Shubham Seth
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मिले
फ़ुर्सत
तो
सुन
लेना
किसी
दिन
मिरा
क़िस्सा
निहायत
मुख़्तसर
है
Hafeez Banarasi
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मालूम
हमें
भी
हैं
बहुत
से
तेरे
किस्से
पर
बात
तेरी
हम
सेे
उछाली
नहीं
जाती
Wasi Shah
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शाम
भी
थी
धुआँ
धुआँ
हुस्न
भी
था
उदास
उदास
दिल
को
कई
कहानियाँ
याद
सी
आ
के
रह
गईं
Firaq Gorakhpuri
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मैं
अगर
अपनी
जवानी
के
सुना
दूँ
क़िस्से
ये
जो
लौंडे
हैं
मेरे
पाँव
दबाने
लग
जाए
Mehshar Afridi
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हसीं
ख़्वाबों
को
अपने
साथ
में
ढोती
हुई
आंँखे
बहुत
प्यारी
लगी
हमको
तेरी
सोती
हुई
आंँखे
मोहब्बत
में
ये
दो
क़िस्से
सुना
है
रोज़
होते
हैं
कभी
हँसता
हुआ
चेहरा
कभी
रोती
हुई
आंँखे
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Naimish trivedi
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अब
उसकी
शादी
का
क़िस्सा
न
छेड़ो
बस
इतना
कह
दो
कैसी
लग
रही
थी
Zubair Ali Tabish
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हमीं
तक
रह
गया
क़िस्सा
हमारा
किसी
ने
ख़त
नहीं
खोला
हमारा
मु'आफ़ी
और
इतनी
सी
ख़ता
पर
सज़ा
से
काम
चल
जाता
हमारा
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Shariq Kaifi
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रफ़्ता
रफ़्ता
ख़त्म
क़िस्सा
हो
गया,
होना
ही
था
वो
भी
आख़िर
मेरे
जैसा
हो
गया,
होना
ही
था
Ashar Najmi
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रिंदों
को
मयख़ाने
से
घर
ले
जाने
वाले
फिर
तेरा
भी
उन
मयख़ानों
से
क्या
रिश्ता
है
मयख़ाने
के
रस्ते
में
जो
भी
उनको
दिखता
इन
दुनिया
वालों
को
वो
ग़ाफ़िल
ही
लगता
है
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Hrishita Singh
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मैं
तो
कमज़र्फ़
हूँ
और
तू
है
ज़की
लोगों
ने
मेरा
सच
फिर
तो
बातिल
किया
Hrishita Singh
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बाख़बर
थी
मैं
भी
इश्क़
की
चाल
से
और
फिर
इश्क़
ने
तेरे
ग़ाफ़िल
किया
Hrishita Singh
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जो
अभी
ख़ुद
कहीं
भी
नहीं
पहुँचे
हैं
आज
वो
रास्ते
मश्वरत
करते
हैं
Hrishita Singh
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मेरी
दुनिया
जिस
में
सिमट
जाती
थी
तो
अब
उसके
कानों
में
बाली
न
हो
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Hrishita Singh
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