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Hrishita Singh
meri duniya jis
meri duniya jis | मेरी दुनिया जिस
- Hrishita Singh
मेरी
दुनिया
जिस
में
सिमट
जाती
थी
तो
अब
उसके
कानों
में
बाली
न
हो
- Hrishita Singh
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इन
सजावटों
की
कोई
आरज़ू
नइँ
जुगनुओं
से
कहना
बत्तियाँ
बुझा
दें
Hrishita Singh
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होना
अब
दर
-
बदर
छोड़
देंगे
ये
गली
रहगुज़र
छोड़
देंगे
काट
कर
तेरी
यादों
का
जंगल
नाम
तेरे
शजर
छोड़
देंगे
सजदे
में
रहना
इक
शख़्स
ख़ातिर
इल्तिजा
भी
असर
छोड़
देंगे
क़ैद
होने
के
डर
से
ही
अब
तो
पंछी
करना
बसर
छोड़
देंगे
है
अगर
पाना
मंज़िल
अकेले
फिर
अधूरा
सफ़र
छोड़
देंगे
मौत
आएगी
क्या
तुमको
भी
तब
हम
भी
तुमको
अगर
छोड़
देंगे
उम्र
थी
इक
सभी
शिकवों
की
भी
लेना
तेरी
ख़बर
छोड़
देंगे
अब
मुयस्सर
नहीं
उनको
रोज़ी
लड़के
भी
अपना
घर
छोड़
देंगे
अच्छा
है
तू
नहीं
हमको
हासिल
वरना
खोने
का
डर
छोड़
देंगे
आख़िरी
झूठ
है
कहते
हो,
ये
कहते
हो
ये
हुनर
छोड़
देंगे
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Hrishita Singh
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मेरी
सुनो
तो
तुम्हें
एक
कहानी
सुनाऊँ
मेरी
कहानी
के
किरदार
अभी
ज़िंदा
हैं
Hrishita Singh
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इश्क़
ये
तो
कोई
भी
आफ़त
नहीं
है
दिल
लगाने
की
पर
इजाज़त
नहीं
है
Hrishita Singh
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अब
कहाँ
कोई
दिवाना
होता
उसके
इश्क़
में
अब
तो
यूँँ
ही
रह
गया
है
जैसे
कोई
क़िस्सा
इश्क़
Hrishita Singh
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