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Harsh Raj
cheezen amar kar sakte hain mere sanam
cheezen amar kar sakte hain mere sanam | चीज़ें अमर कर सकते हैं मेरे सनम
- Harsh Raj
चीज़ें
अमर
कर
सकते
हैं
मेरे
सनम
हम
जिस
जगह
लिख
आते
हैं
मेरे
सनम
कुछ
बात
क्या
की
पत्थरों
से
जो
तेरी
पत्थर
लगे
कहने
ये
हैं
मेरे
सनम
मैं
रम्ज
तेरे
तो
समझता
हूँ
मगर
इक
हाँ
को
बस
हम
बैठे
हैं
मेरे
सनम
तुझको
चिढ़ाते
है
न
मेरे
नाम
से
चल
जीजू
उनके
बनते
हैं
मेरे
सनम
आँखें
बिछाई
हर्ष
ने
अंदर
तेरे
जो
मन
में
हो
दिख
जाते
हैं
मेरे
सनम
- Harsh Raj
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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चलते
हुए
मुझ
में
कहीं
ठहरा
हुआ
तू
है
रस्ता
नहीं
मंज़िल
नहीं
अच्छा
हुआ
तू
है
Abhishek shukla
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मिलने
का
वा'दा
उन
के
तो
मुँह
से
निकल
गया
पूछी
जगह
जो
मैंने
कहा
हँस
के
ख़्वाब
में
Unknown
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आपने
मुझको
डुबोया
है
किसी
और
जगह
इतनी
गहराई
कहाँ
होती
है
दरिया
में
Tehzeeb Hafi
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ऐ
जज़्बा-ए-दिल
गर
मैं
चाहूँ
हर
चीज़
मुक़ाबिल
आ
जाए
मंज़िल
के
लिए
दो
गाम
चलूँ
और
सामने
मंज़िल
आ
जाए
Behzad Lakhnavi
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हद
से
ज़्यादा
भी
प्यार
मत
करना
जी
हर
इक
पे
निसार
मत
करना
क्या
ख़बर
किस
जगह
पे
रुक
जाए
साँस
का
एतिबार
मत
करना
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Qamar Ejaz
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देखो
मुझे
अब
मेरी
जगह
से
न
हिलाना
फिर
तुम
मुझे
तरतीब
से
रख
कर
नहीं
जाते
Danish Naqvi
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ज़िंदगी
फ़िरदौस-ए-गुम-गश्ता
को
पा
सकती
नहीं
मौत
ही
आती
है
ये
मंज़िल
दिखाने
के
लिए
Hafeez Jalandhari
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जिसे
मंज़िल
बताया
जा
रहा
था
वो
रस्ते
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
है
Atul K Rai
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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मेरा
जो
भी
है
सबब-ए-ग़म
तू
ही
है
और
उसपे
ये
सितम
मरहम
तू
ही
है
हो
मेरी
कितनों
से
भी
बातें
हुआ
क्या
एक
ही
है
पर
मेरा
हमदम
तू
ही
है
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Harsh Raj
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रटूँ
दिन
रात
जो
तू
वो
कथन
है
कभी
भूलूं
नहीं
ऐसा
बदन
है
वो
टेडी
जो
लगा
रहता
है
तुम
सेे
मुझे
उस
सेे
बहुत
ज़्यादा
जलन
है
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Harsh Raj
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ज़रा
सी
आँच
से
ये
टूट
जाएगा
तुम्हें
क्या
ही
पता
है
हाले
दिल
मेरा
Harsh Raj
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किसी
को
हो
कोई
भी
मर्ज़
सब
को
कहता
फिरता
हूँ
श़िफा
का
राज़
तेरे
नाम
की
दवा
ज़रूरी
है
Harsh Raj
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इश्क़
ने
मारा
थप्पड़
मुझे
ज़ोर
से
मैंने
फिर
दूसरा
गाल
आगे
किया
पूछा
जब
उसने
किस
रंग
से
रंग
दूँ
सब
को
बाज़ू
रखा
लाल
आगे
किया
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Harsh Raj
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