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Harsh Raj
kisi ko ho koi bhi marz sab ko kahtaa firta hooñ
kisi ko ho koi bhi marz sab ko kahtaa firta hooñ | किसी को हो कोई भी मर्ज़ सब को कहता फिरता हूँ
- Harsh Raj
किसी
को
हो
कोई
भी
मर्ज़
सब
को
कहता
फिरता
हूँ
श़िफा
का
राज़
तेरे
नाम
की
दवा
ज़रूरी
है
- Harsh Raj
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ये
मुझे
नींद
में
चलने
की
जो
बीमारी
है
मुझ
को
इक
ख़्वाब-सरा
अपनी
तरफ़
खींचती
है
Shahid Zaki
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इश्क़
से
तबीअत
ने
ज़ीस्त
का
मज़ा
पाया
दर्द
की
दवा
पाई
दर्द-ए-बे-दवा
पाया
Mirza Ghalib
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दर्द
मिन्नत-कश-ए-दवा
न
हुआ
मैं
न
अच्छा
हुआ
बुरा
न
हुआ
Mirza Ghalib
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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बीमार
को
मरज़
की
दवा
देनी
चाहिए
मैं
पीना
चाहता
हूँ
पिला
देनी
चाहिए
Rahat Indori
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कुछ
तबीयत
में
उदासी
भी
हुआ
करती
है
हर
कोई
इश्क़
का
मारा
हो,
ज़रूरी
तो
नहीं
Jaani Lakhnavi
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इस
मरज़
से
कोई
बचा
भी
है
चारा-गर
इश्क़
की
दवा
भी
है
Unknown
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उल्टी
हो
गईं
सब
तदबीरें
कुछ
न
दवा
ने
काम
किया
देखा
इस
बीमारी-ए-दिल
ने
आख़िर
काम
तमाम
किया
Meer Taqi Meer
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तुम
इस
ख़मोश
तबीअत
पे
तंज़
मत
करना
वो
सोचता
है
बहुत
और
बोलता
कम
है
Nawaz Deobandi
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हम
हैं
रहे-उम्मीद
से
बिल्कुल
परे
परे
अब
इंतज़ार
आपका
कोई
करे!
करे!
मैंने
तो
यूँँ
ही
अपनी
तबीयत
सुनाई
थी
तुम
तो
लगीं
सफाइयाँ
देने,
अरे!
अरे!
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Balmohan Pandey
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तुम्हीं
मेरा
सवाल
हो
तुम्हीं
मेरा
जवाब
भी
मिले
जवाब
इक
दफा
तो
लिख
दूँ
मैं
किताब
भी
नहीं
हो
शक
उसे
सो
पीला
दे
दिया
गुलाब,पर
उसे
तो
देख
कर
गुलाबी
हो
गया
गुलाब
भी
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Harsh Raj
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मेरी
हीर
से
तुम
शिकायत
करोगे
मेरे
दोस्त
मुझ
सेे
बग़ावत
करोगे
तुम्हें
है
पता
फिर
भी
पीछे
पड़े
हो
इरादा
है
क्या
जी
अदावत
करोगे
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Harsh Raj
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अब
आख़िर
आ
गया
वो
वक़्त
जब
बिन
हिचकिचाए
बहाने
ईद
के
तेरे
गले
लग
सकता
हूँ
मैं
Harsh Raj
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अलग
तुम
बेवफ़ाओं
की
वकालत
है
हमारी
फिर
किधर
कैसी
अदालत
है
अगर
ये
है
समझदारी
जो
तुझ
में
है
तो
मुझको
गर्व
है
मुझ
में
जहालत
है
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Harsh Raj
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उलझे
रहो
तुम
और
हाथी
घोड़े
में
इक
प्यादा
रानी
बन
के
राजा
ले
गई
Harsh Raj
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