qismat ka likkha bhi kab mit paaya hai | क़िस्मत का लिक्खा भी कब मिट पाया है

  - Harsh saxena
क़िस्मतकालिक्खाभीकबमिटपायाहै
हमनेभीरोरोकरकामचलायाहै
हमक्याजानेंजन्नतकैसीहोतीहै
उससेेपूछोजिसनेतुमकोपायाहै
हमसेेपूछोप्यारकीपिचकेपेच-ओ-ख़म
हमनेसबसेेपहलेगच्चाखायाहै
जिसकीख़ातिरसबइल्ज़ामलिएसरपे
उसनेभीहमपरइल्ज़ामलगायाहै
इकतितलीकेउड़जानेकेमातममें
जानेसारागुलशनक्यूँमुरझायाहै
यूँँतोशहर-ए-दिलमेंभीड़बहुतहैपर
उसकीअबतककौनजगहलेपायाहै
हिज्रकीदीमकनेतनकायेहालकिया
मुझपेबुढ़ापाउम्रसेपहलेआयाहै
अच्छेशे'रकीक़ीमतहमहीजानेहैं
हमनेउसकोपाकरयारगँवायाहै
उसकेशहरसआनेवालीरेलमें‘हर्ष’
तन्हाईमेंघंटोंवक़्तबितायाहै
  - Harsh saxena
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