baha ke baithe hain ashkon ka ik samundar ham | बहा के बैठे हैं अश्कों का इक समुंदर हम

  - Haidar Jafri
बहाकेबैठेहैंअश्कोंकाइकसमुंदरहम
फिरगएहैंतिरेगाँवसेगुज़रकरहम
किसीकीआरज़ूहमथेजोहुईपूरी
किसीकोहोगएबिनकुछकिएमुयस्सरहम
तुम्हारेदिलमेंहीरहतेथेहमतोमुद्दतसे
किसेबताएँकिअबहोगएहैंबे-घरहम
इसीलिएतोगिरफ़्तारहैंमसाइलमें
समझनेख़ुदकोलगेदूसरोंसेबेहतरहम
फ़ुज़ूलआपभीकोशिशकीजिएसाहब
सकेंगेकभीक़ैद-ए-ग़मसेबाहरहम
कुछवोमेरेबिनाहैकुछमैंउनकेबिना
अगरवोमेरेसनमहैंतोउनकेआज़रहम
येऔरबातकिअर्साहुआबिछड़केमगर
अबतलकभीउन्हेंभूलपाए'हैदर'हम
  - Haidar Jafri
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