jab raston se ishq-e-kaamil hota hai | जब रस्तों से इश्क़-ए-कामिल होता है

  - Haidar Jafri
जबरस्तोंसेइश्क़-ए-कामिलहोताहै
तबबंदानज़दीक-ए-मंज़िलहोताहै
हमदर्दीहैदिलमेंतोफिरराहदिखा
बसतन्क़ीदोंसेक्याहासिलहोताहै
हक़कीबातेंउसकीसमझमेंआतीहैं
जिसबंदेकेसीनेमेंदिलहोताहै
रिश्तोंसेसमझौताकरनापड़ताहै
वर्नाकौनकिसीकेक़ाबिलहोताहै
हैरतहैवोजिसकोहमसेरब्तनहीं
दिलभीउसकीजानिबमाइलहोताहै
आजकहाँइंसाफ़कामंदिरमिलताहै
आजकहाँक़ाज़ीहीआदिलहोताहै
ख़ुदसेतोनमरूदनहींबनताकोई
असलमेंपूराशहरहीबाबुलहोताहै
हमकोतोहँसनेकीआदतहैवर्ना
मुस्कानोंमेंदर्दभीशामिलहोताहै
'हैदर'दिलमेंबसनेवालाहीअक्सर
दिलकेअरमानोंकाक़ातिलहोताहै
  - Haidar Jafri
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