rahoge ham se kab tak be-KHabar se | रहोगे हम से कब तक बे-ख़बर से

  - Hafeez Shahid
रहोगेहमसेकबतकबे-ख़बरसे
जुदाहोतीनहींदीवारदरसे
मुसाफ़िरहालक्याअपनासुनाए
अभीलौटानहींअपनेसफ़रसे
हमेशातोनहींरहताहैक़ाएम
तअ'ल्लुक़राह-रौकारहगुज़रसे
मकानोंसेमकींरुख़्सतहुएहैं
उदासीझाँकतीहैबाम-ओ-दरसे
अभीतकहूँसफ़रमेंइर्तिक़ाके
मुझेलगतेथेरस्तेमुख़्तसरसे
इसीमिट्टीसेहैपहचानमेरी
मोहब्बतहैमुझेभीअपनेघरसे
जानेउनपेक्यागुज़रीथी'शाहिद'
जुदापत्तेहुएथेजबशजरसे
  - Hafeez Shahid
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy