jaada-e-raasti hi kaafi hai | जादा-ए-रास्ती ही काफ़ी है

  - Hafeez Shahid
जादा-ए-रास्तीहीकाफ़ीहै
मुझकोयेरौशनीहीकाफ़ीहै
इसजहाँमेंगुज़ारनेकेलिए
मुख़्तसरज़िंदगीहीकाफ़ीहै
तुझकोफ़र्ज़ानगीमुबारकहो
मुझकोदीवानगीहीकाफ़ीहै
क्याज़रूरतहैदुश्मनोंकीमुझे
आपकीदोस्तीहीकाफ़ीहै
क्याकरूँँगामैंसीम-ओ-ज़रलेकर
दौलत-ए-बे-ख़ुदीहीकाफ़ीहै
दिलकेआँगनमेंरौशनीकेलिए
फ़िक्रकीताज़गीहीकाफ़ीहै
इसचमनमेंख़िज़ाँ-नसीबोंको
इककलीअध-खिलीहीकाफ़ीहै
लश्कर-ए-ग़मसेजीतनेकेलिए
चंद-रोज़ाख़ुशीहीकाफ़ीहै
आरज़ूकेनिहालको'शाहिद'
आँसुओंकीनमीहीकाफ़ीहै
  - Hafeez Shahid
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