mohabbat kya badhi hai vaham baaham badhte jaate hain | मोहब्बत क्या बढ़ी है वहम बाहम बढ़ते जाते हैं

  - Hafeez Jaunpuri
मोहब्बतक्याबढ़ीहैवहमबाहमबढ़तेजातेहैं
हमउनकोआज़मातेहैंवोहमकोआज़मातेहैं
घटतीशान-ए-माशूक़ीजोजातेअयादतको
बुरेवक़्तोंमेंअच्छेलोगअक्सरकामआतेहैं
जोहमकहतेनहींमुँहसेतोयेअपनीमुरव्वतहै
चुरानादिलकाज़ाहिरहैकिवोआँखेंचुरातेहैं
समाँउसबज़्मकाबरसोंहीगुज़राहैनिगाहोंसे
कबऐसे-वैसेजलसेअपनीआँखोंमेंसमातेहैं
कहाँतकइम्तिहाँकबतकमोहब्बतआज़माओगे
उन्हींबातोंसेदिलअहल-ए-वफ़ाकेछूटजातेहैं
ख़ुमारआँखोंमेंबाक़ीहैअभीतकबज़्म-ए-दुश्मनका
तसद्दुक़उसढिटाईकेनज़रहमसेमिलातेहैं
दिलइकजिन्स-ए-गिराँ-मायाहैलेकिनआँखवालोंमें
येदेखेंहुस्नवालेइसकीक़ीमतक्यालगातेहैं
किसीकेसरकीआफ़तहोहमारेसरहीआतीहै
किसीकादिलकोईताकेमगरहमचोटखातेहैं
गएवोदिनकिना
मेंचाकहोतेथे'हफ़ीज़'अपने
हसीनअबतोमिरीतहरीरआँखोंसेलगातेहैं
  - Hafeez Jaunpuri
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