dil waalo kyun dil si daulat yuñ be-kaar lutate ho | दिल वालो क्यूँँ दिल सी दौलत यूँँ बे-कार लुटाते हो

  - Habib Jalib
दिलवालोक्यूँँदिलसीदौलतयूँँबे-कारलुटातेहो
क्यूँँइसअँधियारीबस्तीमेंप्यारकीजोतजगातेहो
तुमऐसानादानजहाँमेंकोईनहींहैकोईनहीं
फिरइनगलियोंमेंजातेहोपगपगठोकरखातेहो
सुंदरकलियोकोमलफूलोयेतोबताओयेतोकहो
आख़िरतुममेंक्याजादूहैक्यूँँमनमेंबसजातेहो
येमौसमरिम-झिमकामौसमयेबरखायेमस्तफ़ज़ा
ऐसेमेंआओतोजानेंऐसेमेंकबआतेहो
हमसेरूठकेजानेवालोइतनाभेदबताजाओ
क्यूँँनितरातोकोसपनोंमेंआतेहोमनजातेहो
चाँद-सितारोंकेझुरमुटमेंफूलोंकीमुस्काहटमें
तुमछुप-छुपकरहँसतेहोतुमरूपकामानबढ़ातेहो
चलतेफिरतेरौशनरस्तेतारीकीमेंडूबगए
सोजाओअब'जालिब'तुमभीक्यूँँआँखेंसुलगातेहो
  - Habib Jalib
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy