koi baat aisi aaj ai mirii gul-rukhsaar ban jaa.e | कोई बात ऐसी आज ऐ मेरी गुल-रुख़्सार बन जाए

  - Habeeb Moosavi
कोईबातऐसीआजमेरीगुल-रुख़्सारबनजाए
किबुलबुलबातोंबातोंमेंदम-ए-गुफ़्तारबनजाए
अयाँहोजज़्ब-ए-शौक़ऐसाहसींआएँज़ियारतको
मिरीतुर्बतकामेलामिस्रकाबाज़ारबनजाए
मिरेहँसनेपेवोकहतेहैंऐसाभीहोबे-ख़ुद
किकोईआदमीसेक़हक़हादीवारबनजाए
तअज्जुबकुछनहींहैगरवफ़ूर-ए-सोज़-ए-फ़ुर्क़तसे
मिराहरमू-ए-तनमिन्क़ार-ए-मौसीक़ारबनजाए
टहलतेगरचलेआएँवोदाग़ोंकेतमाशेको
अभीसर्व-ए-चराग़ाँमेराजिस्म-ए-ज़ारबनजाए
बरहमनशैख़कोकरदेनिगाह-ए-नाज़उसबुतकी
गुलू-ए-ज़ोहदमेंतार-ए-नज़रज़ुन्नारबनजाए
अगरघरसेब-क़स्द-ए-सैरनिकलेवोकमाँ-अबरू
तोबहर-ए-ताइर-ए-दिलहरमिज़ासूफ़ारबनजाए
तबस्सुमकरतमाशादेखकेवहशतकाफिरज़ालिम
मिराचाक-ए-गरेबाँज़ख़्म-ए-दामन-दारबनजाए
यूँँहीहँसहँसकेतुम'आशिक़कारोनादेखतेजाओ
किहरतार-ए-नज़रइकमोतियोंकाहारबनजाए
बढ़ाओमंज़िलततेग़अदाकीतुंद-ख़ूईसे
मुनासिबहैजोयेशमशीरजौहर-दारबनजाए
अगरआईना-ए-दिलसाफ़होहुस्न-ए-तवज्जोहसे
हरइकआँखोंकापर्दापर्दा-ए-असरारबनजाए
यहीहैख़ूँ-बहाचलकरज़राकहदोइशारेसे
'हबीब'-ए-ख़स्ताकामरक़दपस-ए-दीवारबनजाए
  - Habeeb Moosavi
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